गुरु पूर्णिमा 2025: 12 जुलाई को ही क्यों मनाई जाएगी? जानें पंचांग के अनुसार पूरा विवरण
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गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक महान और पावन पर्व है। यह दिन उन सभी गुरुओं को समर्पित होता है जिन्होंने हमारे जीवन में ज्ञान और मार्गदर्शन का प्रकाश फैलाया। हर साल यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।
लेकिन 2025 में गुरु पूर्णिमा विशेष रूप से 12 जुलाई को क्यों मनाई जाएगी?
इसका उत्तर हमें हिंदू पंचांग से मिलता है। आइए विस्तार से समझते हैं।
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गुरु पूर्णिमा क्या है?
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का विभाजन कर चार भागों में बांटा और महाभारत जैसे महाग्रंथ की रचना की। इसलिए इस दिन गुरुजनों का पूजन किया जाता है।
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2025 में गुरु पूर्णिमा की तिथि और समय
तिथि: शनिवार, 12 जुलाई 2025
पंचांग के अनुसार तिथि: आषाढ़ मास की पूर्णिमा
पूर्णिमा आरंभ: 11 जुलाई 2025 को रात 11:22 बजे
पूर्णिमा समाप्त: 13 जुलाई 2025 को रात 12:02 बजे
गुरु पूजन का श्रेष्ठ समय: 12 जुलाई को सूर्योदय से दोपहर तक
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12 जुलाई को ही क्यों मनाई जाएगी?
हिंदू धर्म में व्रत और पर्व सूर्योदय के समय चल रही तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं।
12 जुलाई 2025 को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि ही प्रभाव में रहेगी।
इसी कारण गुरु पूर्णिमा का व्रत और पूजन 12 जुलाई को किया जाएगा।
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पंचांग की भूमिका
हिंदू पंचांग में दिन और तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित होती हैं। जब चंद्रमा पूर्ण रूप से चमकता है, उसे पूर्णिमा कहा जाता है। आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को विशेष माना गया है क्योंकि:
यही वेदव्यास जी की जयंती है।
बौद्ध परंपरा के अनुसार भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश इसी दिन दिया था।
जैन धर्म में भगवान महावीर के पहले शिष्य को दीक्षा इसी दिन मिली थी।
इस सबके कारण, आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
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गुरु पूर्णिमा 2025: विशेष योग और प्रभाव
शुभ योग: गुरु पूजन के लिए उत्तम दिन
चंद्रमा की स्थिति: पूर्ण, जो मन की शांति और ध्यान के लिए उत्तम
शनि का प्रभाव: चूंकि यह दिन शनिवार है, इसलिए संयम और श्रद्धा का विशेष महत्व
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निष्कर्ष
गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल एक तिथि नहीं है, यह आध्यात्मिक ऊर्जा, आभार और श्रद्धा का दिन है। वर्ष 2025 में यह पर्व 12 जुलाई को मनाया जाएगा क्योंकि उस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि प्रभाव में रहेगी, जो पंचांग के अनुसार सर्वोत्तम मानी जाती है।
इस पावन दिन पर आइए, हम अपने गुरुओं को स्मरण करें, उनका आशीर्वाद लें और जीवन में सच्चे मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
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“गुरु वही नहीं जो किताब पढ़ाए,
गुरु वह है जो जीवन का अर्थ समझाए।”
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