डायनासोर से भी पुराना जीव: हॉर्सशू केकड़ा – जिसके नीले रक्त ने बनाई 100+ दवाएं!
प्रकृति में ऐसे कई जीव हैं जो करोड़ों वर्षों से पृथ्वी पर जीवित हैं, और विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भी। उन्हीं में से एक है हॉर्सशू केकड़ा (Horseshoe Crab)। यह जीव डायनासोर से भी पुराना है और आज भी समुद्रों में जीवित है। लेकिन इसके बारे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसका नीला रक्त (blue blood) दुनिया की 100 से भी ज्यादा दवाओं में इस्तेमाल होता है।
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क्या है हॉर्सशू केकड़ा?
हॉर्सशू केकड़ा दिखने में किसी प्राचीन कवचधारी जीव जैसा लगता है। इसका शरीर घोड़े की नाल के आकार का होता है, इसलिए इसे हॉर्सशू केकड़ा कहा जाता है। यह समुद्रतटों के आसपास पाया जाता है और इसकी चार प्रमुख प्रजातियाँ जानी जाती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जीव करीब 45 करोड़ साल पहले भी पृथ्वी पर मौजूद था, यानी डायनासोर से भी पहले।
नीला रक्त – अमूल्य रसायन!
इस जीव की सबसे खास बात है इसका नीला रक्त। इसका रक्त नीला इसलिए होता है क्योंकि इसमें कॉपर (तांबा) आधारित हेमोस्यानिन नामक प्रोटीन होता है, जो ऑक्सीजन को वहन करता है।
लेकिन सिर्फ रंग ही नहीं, इसका उपयोग और भी चौंकाने वाला है – हॉर्सशू केकड़े के रक्त में LAL (Limulus Amebocyte Lysate) नामक एक विशेष पदार्थ होता है, जो बैक्टीरिया की उपस्थिति को तुरंत पहचान सकता है।
दवाओं में क्यों होता है इस्तेमाल?
LAL टेस्ट का उपयोग वैक्सीन, इंजेक्शन, इन्सुलिन, ड्रिप, और मेडिकल उपकरणों की शुद्धता जांचने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से यह पता लगाया जाता है कि किसी दवा या इंजेक्शन में खतरनाक बैक्टीरिया तो नहीं है।
COVID-19 जैसी महामारियों में बनी वैक्सीन्स की सुरक्षा जांच में भी हॉर्सशू केकड़े के रक्त का अहम योगदान रहा।
संकट में है यह अनोखा जीव
दवाओं में अत्यधिक उपयोग की वजह से आज हॉर्सशू केकड़ों की संख्या घटती जा रही है। वैज्ञानिक इन जीवों का रक्त निकालकर उन्हें वापस समुद्र में छोड़ देते हैं, लेकिन फिर भी इनकी मृत्यु दर बढ़ी है।
अब वैज्ञानिक इनकी जगह synthetic (कृत्रिम) विकल्पों पर काम कर रहे हैं ताकि इस प्राचीन जीव को बचाया जा सके।
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निष्कर्ष
हॉर्सशू केकड़ा सिर्फ एक समुद्री जीव नहीं है, बल्कि यह इंसान की जिंदगी बचाने वाला एक अनमोल साथी है। इसका नीला रक्त हमें दिखाता है कि प्रकृति के पास हर बीमारी का समाधान छिपा हो सकता है – बस हमें उसे समझने और संरक्षित करने की जरूरत है।
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